फ़ॉलोअर

सोमवार, 2 मार्च 2020

७७. 'लोकतंत्र संवाद' मंच साहित्यिक पुस्तक-पुरस्कार योजना भाग-१


 'लोकतंत्र संवाद' मंच साहित्यिक पुस्तक-पुरस्कार योजना भाग-१ 


त्यंत हर्ष हो रहा है आपको यह सूचित करते हुए कि 'लोकतंत्र संवाद' मंच साहित्यिक पुस्तकों को पढ़ने हेतु अपने पाठकों और लेखकों को प्रोत्साहित करने का एक छोटा-सा प्रयास करने जा रहा है। इस प्रयास का मूल उद्देश्य साहित्यिक पुस्तकों के प्रति पाठकों के रुचि को पुनः स्थापित करना और उनके प्रति युवा वर्ग के आकर्षण को बढ़ाना है। इस साहित्यिक प्रयास के अंर्तगत माह के तीन बुधवारीय अंक में सम्मिलित की गई सभी श्रेष्ठ रचनाओं में से पाठकों की पसंद और 'लोकतंत्र संवाद' मंच की टीम के सदस्यों द्वारा अनुमोदित तीन सर्वश्रेष्ठ रचनाओं को हम पुरस्कार स्वरूप साहित्यिक पुस्तकें साधारण डाक द्वारा प्रेषित करेंगे। हमारा यह प्रयास ब्लॉगरों में साहित्यिक पुस्तकों के प्रति आकर्षण को बढ़ावा देना एवं साहित्य के मर्म को समझाना है जिससे ब्लॉगजगत केवल इसी मायावी डिजिटल भ्रम में न फँसा रह जाय बल्कि पुस्तकों के पढ़ने की यह पवित्र परंपरा निरंतर चलती रहे। आप विश्वास रखें! इस मंच पर किसी भी लेखक विशेष की रचनाओं के साथ किसी भी प्रकार का कोई भी पक्षपात नहीं किया जायेगा। निर्णय पूर्णतः रचनाओं की श्रेष्ठता और उसके साहित्यिक योगदान पर निर्भर करेगा।
रचनाएं सीधे लेखक के ब्लॉग से लिंक की जायेंगी और माह के अंतिम बुधवारीय अंक में चयनित रचनाओं के लिंक भी आपसभी के समक्ष प्रस्तुत किये जायेंगे।
यह कार्यक्रम दिनांक ०४/०३/२०२० ( बुधवारीय अंक ) से प्रभावी होगा।
विधा: हिंदी साहित्य की कोई भी विधा मान्य है। 
योग्यता: ब्लॉगजगत के सभी सक्रिय रचनाकार ( ब्लॉगर )       

तो आइये! हम एक ऐसे बेहतर साहित्यसमाज का निर्माण करें जो पूर्णतः राजनीतिक,धार्मिक एवं संप्रदाय विशेष की कुंठा से मुक्त हो! इसमें आपसभी पाठकों एवं लेखकों का सहयोग अपेक्षित है। 
सादर
हम आपके ब्लॉग तक निर्बाध पहुँच सकें और आपकी रचनाएं लिंक कर सकें इसलिए आपसभी रचनाकारों से निवेदन है कि आपसभी  लोकतंत्र संवाद मंच ब्लॉग का अनुसरण करें !
'एकलव्य'

              

बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

७६. हम कश्मीर का गए तू तो फिर से अपना न्यूज़ चैनल शुरु कर दिया!




का रे कलुआ! हम कश्मीर का गए तू तो फिर से अपना न्यूज़ चैनल शुरु कर दिया! टैम्फोस तोका औरे कउनो काम नाही रहा का? 
अरे कक्का, आप भी ना! समझे नाही, अरे हमने अपनी दुकान इसलिये बढ़ाई थी कि ऊ दुकानदार सच्चा साहित्य परोसेगा परन्तु ऊ तो पुराने वाले हलुवाई का बाप निकला! मंचों पर देवी-देवताओं की फोटू लगाकर साहित्य और दर्शन की बातें करता है। गेंद अपने पाले में रखने ख़ातिर सबसे पहले अपना ही अफ़ीम सुबह-सुबह लोगों को चटा रहा है! औरे ई हम नाही होने देंगे! अभी हम ज़िंदा हैं। हम भी अब तनहा जी बनायेंगे! आगे समझ लें औरे मंदिर और मस्जिद में बैठकर साहित्य की बातें तो अब हम होने नाही देंगे। चाहे हमें अपनी क़लम ही क्यों ना  तोड़नी पड़े!
लंबे समय बाद लोकतंत्र संवाद मंच का पुनः आरम्भ करते हुए मुझे अपार हर्ष एवं दुःख दोनों का समान रूप से  अनुभव हो रहा है। इसे आप समय और साहित्य दोनों की माँग कह सकते हैं जहाँ अधिकांश ब्लॉगर और लेख़क आज किसी न किसी प्रभावशाली शख़्सियत का ग़ुलाम है। लोकतंत्र संवाद मंच इस ग़ुलामी का प्रखर विरोध करता है और सदैव करता रहेगा जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण केवल पाँच माह में लगभग पचास हज़ार दर्शकों और पाठकों द्वारा इस मंच का वाचन किया जाना रहा है। अतः पुनः
 लोकतंत्र संवाद मंच आप सभी पाठकों का स्वागत करता है। 

आइए चलते हैं इस सप्ताह की कुछ स्तरीय रचनाओं की ओर  
 मुद्दतों बाद उसके हक् में फैसला आया
जिसके इंतज़ार मे साँसें ठहर गयी उसकी।

 ''दीदी अपने घर से बहुत दूर है 
और इस समय इन्हें पैसे की सख्त जरूरत 
होगी आप यह उन्हें अपनी ओर से दे दो और मेरा ज़िक्र 
भी मत करना कहीं उनके आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचे''।

 पत्र लेखन से व्यक्ति के स्वभाव में आने वाले कुछ सकारात्मक 
लक्षणों को निम्नलिखित रूप से सूचीबद्ध किया जा सकता हैः
·         विचारशीलता बढना
·         धैर्यशील होना
·         भाषा का ज्ञान बढना
·         सकारात्मकता
·         चिन्तनशील
·         रचनात्मकता
·         याददाश्त बढना
·         अधिक संवेदनशील होना


 नाता तेरे शहर से पुराना  हैं 
उस बरगद का अफसाना आज का फ़साना सा हैं। 

 वेदना की राह पर
बेचैन मैं हर पल घड़ी ,
तुम सदा थे साथ फिर
क्यों आज मैं एकल खड़ी !

 ताऊ कौन है ?
आजकल फेसबुक पर फिर 
से ताऊ अवतरित हुए हैं । ये ताऊ 
साल भर अंतर्ध्यान रहते हैं लेकिन 
जब जब होली आती है, ये ताऊ फेसबुक की 
ओर अग्रसर हो लेते हैं। वैसे तो हरियाणा का एक एक बंदा ताऊ 
ही होता है। लेकिन ये ताऊ स्पेशल है। क्योंकि ये हरियाणवी ताऊ से भी ज्यादा ताऊ हैं ।

 कल तक जिन आँखों में
 उदासी थी, आक्रोश भी उन्हीं 
आँखों से फूट पड़ता था, झुंझलाकर 
पति-पत्नी दोनों ही कह उठते थे कि नहीं 
अब बेटे से आस नहीं रखनी, वह पराया हो गया है! 

 भावों की सरिता में बहते ,
बहते भावों को उनमें देखा ।

 दीवार उठती है
बाँटती है
आचार-विचार
रहन-सहन
दशा-दिशा

 एक छोटी-सी टिकिया
जो वहीं कहीं कोने में फेंक दी जाती है
और नंगे पाँव ही निकल पड़ती है पोखर की ओर
हुर्र... हुर्र....हुर्र....

और अंत में आदरणीया आँचल पांडेय जी द्वारा रचित एवं उनके ही स्वर में उनकी एक रचना 

उद्घोषणा 
 'लोकतंत्र 'संवाद मंच पर प्रस्तुत 
विचार हमारे स्वयं के हैं अतः कोई भी 
व्यक्ति यदि  हमारे विचारों से निजी तौर पर 
स्वयं को आहत महसूस करता है तो हमें अवगत कराए। 
हम उक्त सामग्री को अविलम्ब हटाने का प्रयास करेंगे। परन्तु 
यदि दिए गए ब्लॉगों के लिंक पर उपस्थित सामग्री से कोई आपत्ति होती
 है तो उसके लिए 'लोकतंत्र 'संवाद मंच ज़िम्मेदार नहीं होगा। 'लोकतंत्र 'संवाद मंच किसी भी राजनैतिक ,धर्म-जाति अथवा सम्प्रदाय विशेष संगठन का प्रचार व प्रसार नहीं करता !यह पूर्णरूप से साहित्य जगत को समर्पित धर्मनिरपेक्ष मंच है । 
धन्यवाद। 

 टीपें
 अब 'लोकतंत्र'  संवाद मंच प्रत्येक 'बुधवार '
सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित
होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

आज्ञा दें  !


'एकलव्य' 


आप सभी गणमान्य पाठकजन  पूर्ण विश्वास रखें आपको इस मंच पर  साहित्यसमाज से सरोकार रखने वाली सुन्दर रचनाओं का संगम ही मिलेगा। यही हमारा सदैव प्रयास रहेगा।
                                                                                              
                                                                                             सभी छायाचित्र : साभार  गूगल

सोमवार, 25 नवंबर 2019

अक्षय गौरव पत्रिका, संपादक मंडल का पुनर्गठन


अक्षय गौरव पत्रिका, संपादक मंडल का पुनर्गठन

संपादक मंडल: अक्षय गौरव पत्रिका 

संरक्षक 
डॉ. फखरे आलम खान

वरिष्ठ संपादकीय सलाहकार 
प्रोफ़ेसर गोपेश मोहन जैसवाल

संपादकीय सलाहकार
न्यायविद डॉ.चन्द्रभाल सुकुमार

प्रधान संपादक 
विश्वमोहन

संपादक 
रवीन्द्र सिंह यादव

संयोजक 
ध्रुव सिंह 'एकलव्य'

संपादकीय टीम: पद्य खंड                                                  संपादकीय टीम: गद्य खंड                  
संपादकसाधना वैद                                                          संपादकविभा रानी श्रीवास्तव 'दंतमुक्ता'  
वरिष्ठ उप संपादक -पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा                        वरिष्ठ उप संपादक- सुधा सिंह 'व्याघ्र
 उप संपादक - अनीता लागुरी 'अनु'                        '             उप संपादक - शीरीं तस्कीन      

                                                                                                  
 संपादकीय टीम: बाल-साहित्य                                                     साहित्यिक गतिविधियाँ
संपादक  - रेणुबाला                                                               संपादक : मीना भारद्वाज 
वरिष्ठ उप संपादक - पम्मी सिंह 'तृप्ति
उप संपादक - आँचल पाण्डेय     
  
                                                                  
तकनीकी विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह विष्ट








गुरुवार, 22 अगस्त 2019

"अक्षय गौरव" पत्रिका में रचना प्रेषित करने एवं प्रकाशन सम्बन्धी नियम


         आवश्यक सूचना :

'अक्षय गौरव' पत्रिका (ई-पत्रिका एवं प्रिंट वर्ज़न) का आगामी अंक (जुलाई-अगस्त 2019) अक्टूबर के प्रथम

सप्ताह में प्रकशित होगा। इस अंक के लिये पाठकों से उनकी मौलिक स्वरचित अप्रकाशित एवं अप्रसारित

रचनाएँ आमंत्रित हैं। हमें आपकी रचनाएँ नीचे दिये ईमेल पर 5 सितंबर 2019 तक भेज सकते हैं-

editor.akshayagaurav@gmail.com   



केवल एक ही रचना भेजने की अपेक्षा की जाती है।

रचना भेजने सम्बन्धी नियमों का अवश्य अवलोकन करें ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

पिछले दोनों अंकों ( जनवरी-मार्च / अप्रैल-जून 2019) के प्रिंट वर्ज़न उपलब्ध कराये जा रहे हैं। जिन रचनाकारों

की रचनाएँ इन अंकों में प्रकाशित हुईं हैं वे अपनी रचना को प्रिंट वर्ज़न में प्राप्त करके रचना प्रकाशन के

अनुभव को यादगार बना सकते हैं।

सधन्यवाद।





 1. प्रेषित की गयी रचना पूर्णतः मौलिक, अप्रकाशित एवं अप्रसारित होनी चाहिए अन्यथा रचना पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। इस बाबत रचना के साथ घोषणा-पत्र संलग्न करें। (घोषणा-पत्र इस प्रकार होगा- "मैं यह घोषणा करता /करती हूँ कि प्रस्तुत रचना स्वरचित, निताँत मौलिक, अप्रकाशित एवं अप्रसारित है।" अंत में रचनाकार का पूरा नाम व पता (छायाचित्र के साथ संलग्न करें )।
2. रचना में मात्रा एवं टंकण की अशुद्धियाँ यथासंभव नहीं होनी चाहिए।
3. एक अंक हेतु केवल एक ही रचना हिंदी साहित्य की किसी भी विधा में प्रेषित की जानी चाहिए।
4. रचनाओं के चयन में अंतिम निर्णय संपादक मंडल का होगा।
5. रचना के स्वीकृत होने पर रचनाकार को ई-मेल द्वारा सूचित किया जाएगा एवं रचनाएँ अस्वीकृत होने की दशा में रचनाकार से कोई पत्राचार नहीं किया जाएगा।
6. रचना केवल क्रुतिदेव 101 अथवा यूनिकोड में हो तो बेहतर होगा।
7. रचना प्रकाशित करने के लिये न ही कोई शुल्क लिया अथवा दिया जाएगा। यह पूर्णतः हिंदी साहित्य के सम्वर्धन हेतु प्रारम्भ की गयी अव्यवसायिक पत्रिका है।
8. रचना में विवादित सामग्री अथवा किसी भी धर्म,सम्प्रदाय, नश्ल, जाति एवं धार्मिक-सामाजिक विशिष्ट पहचान सूचक सम्बन्धी शब्दों का प्रयोग न करें और यदि रचनाकार फिर भी इन बातों को नजरअंदाज करते हुए ऐसी रचनाओं का सृजन करता है और रचना प्रकाशित हो जाती है तो सम्पूर्ण जवाबदेही उक्त रचनाकार की ही होगी न कि सम्पादक व प्रकाशक की।
9. हिंदी साहित्य की सभी विधाओं की रचनाएँ नीचे दिए गये ई-मेल पर प्रेषित करें-

editor.akshayagaurav@gmail.com

10. प्रेषित रचना में किसी भी लिंक का उल्लेख न करें।
11. रचनाएँ प्रेषित करने की अंतिम तिथि : 05 सितम्बर 2019 तक रचनाएँ हमें प्रेषित की जा सकती हैं। निर्धारित समय के पश्चात प्राप्त रचनाओं पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।

ई-पत्रिका "अक्षय गौरव" आप सभी रचनाकारों एवं सुधि पाठकों का साहित्य सृजन के अभिनव प्रयोग एवं आयोजन में स्वागत करती है।




गुरुवार, 9 मई 2019

अक्षय गौरव ई -पत्रिका जनवरी -मार्च अंक का प्रकाशन हो चुका है।

     


आवश्यक सूचना :

सभी गणमान्य पाठकों एवं रचनाकारों को सूचित करते हुए हमें अपार हर्ष का अनुभव हो रहा है कि अक्षय गौरव ई -पत्रिका जनवरी -मार्च अंक का प्रकाशन हो चुका है। कृपया पत्रिका को डाउनलोड करने हेतु नीचे दिए गए लिंक पर जायें और अधिक से अधिक पाठकों तक पहुँचाने हेतु लिंक शेयर करें  ! सादर      


रविवार, 3 फ़रवरी 2019

अक्षय गौरव ई-पत्रिका के संपादक मंडल सदस्यों के नाम घोषित !

आदरणीया /आदरणीय ,
आपको सूचित करते हुए हमें हर्ष का अनुभव हो रहा है
 कि अक्षय गौरव ई-पत्रिका के संपादक मंडल सदस्यों का नाम घोषित 
हो चुका है। विलम्ब के लिए हम सभी से क्षमाप्रार्थी हैं। संपादक मंडल के सदस्यों का नाम आप 
नीचे दिए गए लिंक पर जाकर देखें ! सादर 'एकलव्य' 




आवश्यक सूचना :
अक्षय गौरव त्रैमासिक ई-पत्रिका के प्रथम आगामी अंक ( जनवरी-मार्च 2019 ) हेतु हम सभी रचनाकारों से हिंदी साहित्य की सभी विधाओं में रचनाएँ आमंत्रित करते हैं। 15  फरवरी  2019  तक रचनाएँ हमें प्रेषित की जा सकती हैं। रचनाएँ नीचे दिए गये ई-मेल पर प्रेषित करें- editor.akshayagaurav@gmail.com 
अधिक जानकारी हेतु नीचे दिए गए लिंक पर जाएं !

सोमवार, 28 जनवरी 2019

७५ ..........रामप्यारी के जूड़े में कउनो लाल-पीली

का रे कलुआ ! ई का कर रहा है अपनी प्यारी साइकिल रामदुलारी के साथ ! ई झंडा-वन्दा ,ई लकड़ी में लगाकर काहे रामप्यारी का बोझ बढ़ाता है ? अरे कक्का ! जब भी बोलिहो ! एकदम काली ज़ुबान ! अरे तोका दिखत नाहीं ? अरे छब्बीस जनवरी आये वाला है, अउर देश के प्रति कउनो हमरो कर्तव्य हौ कि नाही। देशप्रेम ,राष्ट्रवाद देशभक्ति ! 
अरे कलुआ ! तुम भी एकदम टेमफोस हो ! ई सब तो ठीक बा परन्तु उधर भी तो देख ! जनता के प्रतिनिधियन क ! ऊ कउन सा देश का झंडा अपने फोरव्हीलर पर लगाकर चलत हैं। सभई अपने-अपने पार्टी के झंडा अपनी फटफटिया में घुसेड़कर ही घूमत हैं यहाँ-वहाँ ! त का पुलिसवाले उन्हें सलामी ना बजावत हैं। हमरी मान तो तू भी अपनी रामप्यारी के जूड़े में कउनो लाल-पीली ,हरी-नीली पार्टी का झंडा खोंस ले ! 
बाकी सब ठीक बा !
जय भारत 
 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 
जुंबिशें - - - दोहे 58-60
 शक्ति को भगती मिले, ऐसे हैं संदेश.

 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें
 वीर जवान
कदम से कदम
मिलाते चलें !

अवसाद 
 बन कर चन्द्र ग्रहण,
अंतरिक्ष में।
कराहती कातर राका,

कारावास में।

इसे भी इश्क़ में धोखा हुआ है़

  वह अहसास
 वह अहसास लौटा देती है मुझे
मेरी ब्वै की कुछली
जिसमें मैं दुबक जाता था

आरक्षण : एक ज्वलंत और सम्वेदनशील मुद्दा

 1951 की जनगणना के 
आधार पर सदियों से हाशिये 
पर धकेल दी गयीं सामाजिक एवं शैक्षिक
रूप से वंचित-शोषित अनुसूचित जनजातियों एवं अनुसूचित
जातियों को सम्विधान निर्माता स्वर्गीय डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पहल पर  क्रमशः 7.5% , 15 %
आरक्षण सरकारी नौकरियों में इनकी जनसँख्या  के अनुपात में प्रतिनिधित्व तय किया गया।

 अम्मा का निजी प्रेम
 तिल चुपड़ कर नहाऐं
और अम्मा के भगवान के पास
एक एक मुठ्ठी कच्ची खिचड़ी चढ़ाऐं

 कोमल पत्ते
 तो पीले पड़ जाएंगे वे,

तुम जैसे हो जाएंगे।

 क्या दीवार हो तुम?
 जो जकड़ी होती है
सीमेंट से, बालू से
ताकि ढह ना जाए।

 बहेलिया सोच रहा था 

 परिंदों का सौदाकर
उत्साहित था 
नहीं थे पाँव ज़मीं पर
मन भटक रहा था
कहीं पर
हिंसा, तृष्णा, अहँकार, दम्भ, लोलुपता और फ़रेब


उद्घोषणा 
 'लोकतंत्र 'संवाद मंच पर प्रस्तुत 
विचार हमारे स्वयं के हैं अतः कोई भी 
व्यक्ति यदि  हमारे विचारों से निजी तौर पर 
स्वयं को आहत महसूस करता है तो हमें अवगत कराए। 
हम उक्त सामग्री को अविलम्ब हटाने का प्रयास करेंगे। परन्तु 
यदि दिए गए ब्लॉगों के लिंक पर उपस्थित सामग्री से कोई आपत्ति होती
 है तो उसके लिए 'लोकतंत्र 'संवाद मंच ज़िम्मेदार नहीं होगा। 'लोकतंत्र 'संवाद मंच किसी भी राजनैतिक ,धर्म-जाति अथवा सम्प्रदाय विशेष संगठन का प्रचार व प्रसार नहीं करता !यह पूर्णरूप से साहित्य जगत को समर्पित धर्मनिरपेक्ष मंच है । 
धन्यवाद।
 टीपें
 अब 'लोकतंत्र'  संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार'
सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित
होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

आज्ञा दें  !



'एकव्य' 

आप सभी गणमान्य पाठकजन  पूर्ण विश्वास रखें आपको इस मंच पर  साहित्यसमाज से सरोकार रखने वाली सुन्दर रचनाओं का संगम ही मिलेगा। यही हमारा सदैव प्रयास रहेगा।     
     सभी छायाचित्र : साभार  गूगल 



आवश्यक सूचना :
अक्षय गौरव त्रैमासिक ई-पत्रिका के प्रथम आगामी अंक ( जनवरी-मार्च 2019 ) हेतु हम सभी रचनाकारों से हिंदी साहित्य की सभी विधाओं में रचनाएँ आमंत्रित करते हैं। 15 फरवरी  2019  तक रचनाएँ हमें प्रेषित की जा सकती हैं। रचनाएँ नीचे दिए गये ई-मेल पर प्रेषित करें- editor.akshayagaurav@gmail.com