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सोमवार, 22 अक्तूबर 2018

६५............जीवित होने का प्रमाण !

ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती और जीवित होने का प्रमाण हमारा निरंतर ही कुछ न कुछ सीखने की जिज्ञासा रखना ! इसी क्रम में हम आज आपको एक ऐसे ही रचनाकार और उनकी रचना से आपका साक्षात्कार कराते हैं जो स्वयं को गुरु कम शिष्य के रूप में ज्यादा प्रस्तुत करते हैं। 
हमारे आज के अतिथि रचनाकार

आदरणीय रवींद्र सिंह यादव जी 

उनकी एक प्रयोगवादी रचना 

रेल-हादसा (वर्ण पिरामिड)

 1. 

था 

क्रूर 

हादसा 

दशहरा 

अमृतसर 

रेल-रावण को 

दोष मढ़ते हम। 


2. 

ये

नेता  

मौत में 

तलाशते 

अपनी जीत 

सम्वेदना लुप्त 

दोषारोपण ज़ारी। 


3. 

वे 

लेते 

वेतन 

सरकारी 

हैं अधिकारी 

ओढ़ते लाचारी 

क्यों जनता बेचारी? 



4. 

थी 

एक 

जिज्ञासा 

रावण को 

देखें जलता 

विडियो बनाते 

क्षत-विक्षत हुए। 


5. 

है 

छाया 

मातम 

शहर में 

चीख़-पुकार 

 है मौन मंज़र 

हुए यतीम बच्चे।  

                                                             -रवीन्द्र सिंह यादव 
   'लोकतंत्र' संवाद मंच 
अपने साप्ताहिक सोमवारीय अंक के इस कड़ी में आपका हार्दिक स्वागत करता है।

   चलते हैं इस सप्ताह की कुछ श्रेष्ठ रचनाओं की ओर ........



 अध-लिखे कागज़ किताबों में दबे ही रह गए
कुछ अधूरे ख़त कहानी बोलते ही रह गए


ठती गिरती साँसों में
खयालों में अहसासों में
पलकर पल पल पलकों में
भाव गूँथ गुंफ अलकों में



‘अकबर इलाहाबादी’, ओह माफ़ कीजिएगा ! ‘अकबर प्रयागराजी’ ने आम आदमी की जीवन भर की उपलब्धियों पर क्या ख़ूब कहा है -
‘हम क्या कहें, अहबाब वो, कारे नुमाया, कर गए,
बी. ए. किया, नौकर हुए, पेंशन मिली, और मर गए.’


उद्घोषणा 
 'लोकतंत्र 'संवाद मंच पर प्रस्तुत 
विचार हमारे स्वयं के हैं अतः कोई भी 
व्यक्ति यदि  हमारे विचारों से निजी तौर पर 
स्वयं को आहत महसूस करता है तो हमें अवगत कराए। 
हम उक्त सामग्री को अविलम्ब हटाने का प्रयास करेंगे। परन्तु 
यदि दिए गए ब्लॉगों के लिंक पर उपस्थित सामग्री से कोई आपत्ति होती
 है तो उसके लिए 'लोकतंत्र 'संवाद मंच ज़िम्मेदार नहीं होगा। 'लोकतंत्र 'संवाद मंच किसी भी राजनैतिक ,धर्म-जाति अथवा सम्प्रदाय विशेष संगठन का प्रचार व प्रसार नहीं करता !यह पूर्णरूप से साहित्य जगत को समर्पित धर्मनिरपेक्ष मंच है । 

धन्यवाद।

 टीपें
 अब 'लोकतंत्र'  संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार'
सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित
होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

आज्ञा दें  !



'एकव्य' 

आप सभी गणमान्य पाठकजन  पूर्ण विश्वास रखें आपको इस मंच पर  साहित्यसमाज से सरोकार रखने वाली सुन्दर रचनाओं का संगम ही मिलेगा। यही हमारा सदैव प्रयास रहेगा।

   सभी छायाचित्र : साभार  गूगल