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सोमवार, 23 जुलाई 2018

५३......जिंदगी है घूमता पहिया

 चाहो न चाहो,यह लम्हा भी गुजर जाता है 
रेत ही है कितना भी पकड़ो जतन से, फितरत है इसकी 
कुछ पल में फिसल जाता है 
जिंदगी है घूमता पहिया,मौत भी है पहलू दूजी 
बर्फ़ है काफ़िर जिंदगी,गर्म होते ही पिघल जाती है
 आदरणीया  निशा नंदिनी भारतीय जी
'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने साप्ताहिक सोमवारीय अंक के लेखक परिचय श्रृंखला की इस कड़ी में आपका हार्दिक स्वागत करता है। 
परिचय 
 नाम- निशा नंदिनी भारतीय 
जन्म तिथि: -13-9-1962
कर्म स्थान - तिनसुकिया, असम 
पिता - स्वर्गीय  बैज नाथ गुप्ता 
माता- राधादेवी गुप्ता 
पति-लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता 
शिक्षा -
1983- एम.ए -( तीन विषयों में) हिन्दी, समाजशास्त्र ,दर्शनशास्त्र ( बी.एड ) सभी प्रथम श्रेणी में ।
रूचि- कक्षा आठवीं में पहली रचना लिखी थी।तब से लेखनी अनवरत चल रही है। इसके साथ ही नाटक,आलेखन कला,चित्र कला तथा हस्तशिल्प में रूचि ।
वर्तमान 
वरिष्ठ अध्यापिका - विवेकानंद केंद्र विद्यालय, असम 
शिक्षण कार्य- 30 वर्षों से 
तिनसुकिया कॉलेज और वीमेंस कॉलेज में - 10 वर्ष  
लेखन- लगभग 35 वर्षों से  
सभी विधाओं में 
प्रकाशित पुस्तकें- 20
काव्य संग्रह - 
"भाव गुल्म" "शब्दों का आईना" "आगाज" "जुनून" "कोरा कागज़" "बोलती दीवारें" "दिल की जुबां से" "तार पर टंगी बूँदें" "दो आँसू एक रूप" "क्षितिज की रेखा" "सीप के मोती" लेख संग्रह- "कन्यादान किसका और क्यों"  "जादू सकारात्मक सोच का" "भारत का गौरव है असम"
जीवनी संग्रह - "जिज्ञासा"
कहानी संग्रह-  "एक थी रतना"
बाल साहित्य - "जादूगरनी हलकारा"  "जादुई शीशमहल" "शिशु गीत" "पैसों का पेड़"                                            
सांझा काव्य संग्रह -
"पुष्पगंधा" "काव्य अमृत" "सहोदरी भाषा"सोपान -3 
संपादन- "मुक्त हृदय" (बाल काव्य संग्रह )
विशेष- 2017 में  संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय, अमरावती के (बी. कॉम. प्रथम वर्ष)अनिवार्य हिन्दी के लिए स्वीकृत पाठ्यपुस्तक "गुंजन" में "प्रयत्न" कविता संकलित की गई है। "शिशु गीत" पुस्तक का (तिनसुकिया असम) के विभिन्न विद्यालयों में पठन-पाठन
सम्मान-
(1)2015 मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से माननीय शिक्षा मंत्री स्मृति इरानी जी द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहन प्रमाण पत्र ।
(2)2015 कवि हम तुम साहित्य संस्था द्वारा साहित्यकार सम्मान  
(3)10 से 16 दिसंबर 2016 वैश्विक साहित्यिक व सांस्कृतिक महोत्सव इंडोनेशिया और मलेशिया में साहित्य वैभवसम्मान  
(4)जे.एम.डी प्रकाशन दिल्ली द्वारा "काव्य अमृत" सम्मान 
(5)5 से 7 मई 2017 इलाहाबाद में राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला में शोध पत्र प्रस्तुत किया ।जिसके लिए प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
(6)2 से 7 जून  2017 थाईलैंड के क्राबी महोत्सव में साहित्य वैभव अवार्ड से सम्मानित ।
(7)29 जनवरी 2017 जे.सी. आई क्लब तिनसुकिया द्वारा शिक्षक सम्मान ।
(8)24-सितंबर 2017 अग्रसेन जयंती के अवसर पर साहित्यकार सम्मान ।
(9)5 सितंबर 2017 लॉयंस क्लब तिनसुकिया द्वारा शिक्षक दिवस पर सम्मान ।                       (10)23 दिसंबर 2017 हिन्दी साहित्य सम्मेलन की रजत जयंती के अवसर पर तेजपुर, असम में साहित्यकार सम्मान ।
(11) 16 जनवरी 2018 भारत सरकार आकाशवाणी की ओर से इंदौर में आयोजित सर्वभाषा कवि सम्मेलन में भाग लिया। यह कवि सम्मेलन "वल्ड बुक रिकार्ड" में दर्ज किया गया है । 
(12)1अप्रैल 2018 को पुष्पवाटिका पत्रिका परिवार की ओर से"सारस्वत सम्मान"प्राप्त हुआ।
(13)28 मई 2018 को जर्मनी के म्यूनिख शहर में राष्ट्र भाषा के प्रचार प्रसार के लिए युवा साहित्यकारों के साथ इंद्रप्रस्थ लिटरेचर फेस्टिवल की तरफ से एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया।
14) 5 जून 2018 राष्ट्रीय नागरी एंव पर्यावरण संस्था द्वारा सम्मानित 
15) 10 जून 2018 विलक्षण संस्था द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर "विलक्षण समाज सारथी"सम्मान 
पद भार-
2-शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की कार्यकर्ता 
3- 1992 से विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की कार्यकर्ता 
प्रसारण -
रामपुर उत्तरप्रदेश,डिब्रुगढ़ असम व दिल्ली आकाशवाणी व दूर्दशन से परिचर्चा,वार्तालाप,कवि गोष्ठी,नाटक आदि का प्रसारण।
प्रकाशित-                                          
देश भर की प्रसिद्ध विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविता,कहानी,लेख व जीवनियाँ प्रकाशित ।
उद्देश्य-सकारात्मक सोच द्वारा देश की सेवा करना ही जीवन का उद्देश्य है । 
वर्तमान पता- निशा गुप्ता 
पति श्री एल.पी गुप्ता 
आर.के.विला 
बाँसबाड़ी, हिजीगुड़ी, 
गली- ज्ञानपीठ स्कूल
तिनसुकिया, असम 
786192

ई-मेल आईडी : nishaguptavkv@gmail.com
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तो चलिए ! चलते हैं इस सप्ताह के कुछ श्रेष्ठ रचनाओं की ओर 


ख़्वाहिशे पैग़म्बरी
कुछ ख़ता पैदा करुँ, फ़िर कुछ सज़ा पैदा करुँ,

मौत से पहले ही इक, यौमे जज़ा3 पैदा करुँ.

सफ़र ..... 
ट्रेन में
खिड़की वाली
सीट पर बैठी
पीछे छुटते हुए तमाम
दृश्य को अपनी
आँखों में बसा लेने के
प्रयास में चली जा रही हूँ,

 अम्ल भरकर बौछार करते हुए
ताजा हो रहा है वो पल एक बार फिर
कि जो मन से कभी उतरा ही नहीं,
आज फिर ज़िन्दगी 

  जिन किताबों में फूल थे सूखे
शेल्फ से वो निकाल रक्खी हैं 

हैं तो ये गल्त-फहमियाँ लेकिन
चाहतें दिल में पाल रक्खी हैं

उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे।

नहीं बिल्कुल नहीं भीगी थी 
बारिश की फुहारों में 


रोटी ,कपड़ा और मकान 

 और 
‘अब के सावन में 
शरारत ये मेरे साथ हुई 
मेरा घर छोड़ के 
कुल शहर में बरसात हुई.’
कभी भुलाए नहीं भूलते.

 इस जीवन के माने क्या थे,
तुमसे मिलने की घड़ियाँ थीं !
गर वो उधार की खुशियाँ थीं
तो उनको अब वापस ले लो !
इतनी इनायत और करो.....

 सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस।
राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास॥


पहली बारिश में तर-ब-तर 
आया कोई  उसके  नीचे 
ख़ुद को बारिश से बचाने 
थमने  लगी  बरसात
माटी की सौंधी गंध 

आदरणीय गोपालदास 'नीरज' जी 


उद्घोषणा 
 'लोकतंत्र 'संवाद मंच पर प्रस्तुत 
विचार हमारे स्वयं के हैं अतः कोई भी 
व्यक्ति यदि  हमारे विचारों से निजी तौर पर 
स्वयं को आहत महसूस करता है तो हमें अवगत कराए। 
हम उक्त सामग्री को अविलम्ब हटाने का प्रयास करेंगे। परन्तु 
यदि दिए गए ब्लॉगों के लिंक पर उपस्थित सामग्री से कोई आपत्ति होती
 है तो उसके लिए 'लोकतंत्र 'संवाद मंच ज़िम्मेदार नहीं होगा। 'लोकतंत्र 'संवाद मंच किसी भी राजनैतिक ,धर्म-जाति अथवा सम्प्रदाय विशेष संगठन का प्रचार व प्रसार नहीं करता !यह पूर्णरूप से साहित्य जगत को समर्पित धर्मनिरपेक्ष मंच है । 
धन्यवाद।
 टीपें
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सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित
होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

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