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रविवार, 7 जनवरी 2018

१० ......इक्कीसवीं सदी का बॉयफ्रेंड ( भाग - 'नौ' )

......मुहल्ले के कालोनी के बाहर आशियाना रोड और किनारे एक दुकान, 
कुछ ठीक-ठाक हालत में। रंग -बिरंगी छनती हुई जलेबी,
छानता हुआ एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति। 
नाम -छन्नु लाल 
पिता का नाम -खेसारी लाल 
जिला - फैज़ाबाद  
जो लखनऊ आकर बस गए थे, किसी ज़माने में। 
कोई काम नहीं था ,एक हलवाई की दुकान में टेबल पर 
पोंछा मारा करते और समय मिलने पर हलवाई का 
काम भी सीखते। चार -पाँच सालों में खुद की दुकान डाल दी। 
फिर क्या था, इनकी दुकान ऐसी घूमी ज़लेबी की तरह ! 
आज तक घूम रही है। 
  ( शेष अगले अंक में )

"लोकतंत्र" संवाद 
आपका हार्दिक स्वागत करता है।  



आज के रचनाकार :

  • आदरणीया 'रेवा' जी 
  • आदरणीया वीणा सेठी 
  • आदरणीय 'अजीत' जी 
  • आदरणीया  ऋता शेखर 'मधु'



अभिनय ??
न तो !!


एक अबूझ पहेली,
न जाने फिर भी  


उसने कहा 
मेरा पार्टनर कहता है 


 फिर से रमिया चलो गाँव में
लेकर अपनी टोली
छोड़ चलो अब महानगर की



अगले अंक में 
आपका स्वागत है। 









छायाचित्र स्रोत : गूगल