समर्थक

शनिवार, 6 जनवरी 2018

९.......इक्कीसवीं सदी का बॉयफ्रेंड ( भाग - 'आठ' )

.......इक्कीसवीं सदी के प्रेमी-प्रेमिकाओं की लगभग 
सारी विशेषताएं व एडवांस्मेंट मैंने आपको बताईं। 
हो सकता है कुछ छूट भी गईं हों,कृपया एडजस्ट करिएगा ! 
आख़िर भारतीय हैं आप ! 
हमारा देश एडजस्टमेंट पर ही चलता है। 
सफ़र में एडजस्टमेंट 
रहने में एडजस्टमेंट 
खाने में  एडजस्टमेंट 
नहाने में एडजस्टमेंट 
राजनीति में एडजस्टमेंट 
धाँधली में एडजस्टमेंट। 
रहने दीजिए ! एडजस्टमेंट की एक लम्बी लिस्ट ही है। 
चलिए आपको मिलवाता हूँ ,अपने पटकथा के 'नायक' यानि 
मिस्टर इक्कीसवीं सदी के बॉयफ्रेंड से। 
  ( शेष अगले अंक में )


"लोकतंत्र" संवाद 
ब्लॉग आपका हार्दिक स्वागत करता है। 


आज के रचनाकार :

  • आदरणीया कविता रावत 
  • आदरणीया आशा सक्सेना 
  • आदरणीय राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"
  • आदरणीया अनीता लागुरी  


एक हमारा प्यारा तोता
 चोंच उसकी है लाल-लाल
ठुमक-ठुमक है उसकी चाल

घर-भर वह पूरे घूमता रहता

 एक वादा खुद से 
 शायद यह तो पूरा 
कर ही सकते हैं ! 
अधिक की अपेक्षा नहीं की 

आज तक कभी

 सामाजिक पशु


 पशु, जब जो चाहा,
उसे देता है अंजाम,
करता है हमला और हत्या,
विचार आते हैं मुझे भी,

 तुम्हारे प्यार में..... 


 क्या तुम्हें नींद नहीं आती
यों  टकटकी लगाए,
क्या देखते हो



पुनः उपस्थित होता हूँ  
अगले अंक के साथ। 

आज्ञा दें !

"एकलव्य" 

   छायाचित्र स्रोत : गूगल