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शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

१५ .......इक्कीसवीं सदी का बॉयफ्रेंड ( भाग - १४ वां )

छन्नु लाल - चासनी तैयार है क्या ?
हँसमुख - अरे बापू ! देखते नहीं ,व्हाट्सअप पर 
इम्पोर्टेन्ट मैसेज देख रहा हूँ। खुद ही तैयार कर लो !
छन्नु लाल ( समझाते हुए ) - अरे बेटा ! तू हलवाई का बेटा है ,समझा। 
तेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट है !
जलेबी के चासनी में कितनी चीनी हो !
समोसे का आलू पूरी तरह पका है कि नही !
दुकान का हिसाब -किताब ठीक चल रहा है या नही !
हँसमुख - क्या बापू ! आप भी अपने बेटे को क्या समझ रखा है। 
अरे ! मैं इक्कीसवीं सदी की नस्ल हूँ।  
  .....  ( शेष अगले अंक में )


कोटि -कोटि नमन। 

"लोकतंत्र" संवाद मंच 
आप सभी का स्वागत करता है। 


आज के हमारे रचनाकार :

  • आदरणीया सुनीता शानू जी 
  • आदरणीया सारिका मुकेश 
  • आदरणीया शिखा कौशिक 
  • आदरणीया नीतू ठाकुर 



    
क्यूँ अपमानित हुआ जाता है,
ये सच है कि सुबह का भूला,
लौट शाम घर आता है,...रे मन तू...



हमसब अंततः। 


 कड़वा , खट्टा  ,मिर्चीला
हर बोल चल जाता है ,
विकट क्षणों में किन्तु मित्र का
मौन  खल जाता है  !


क्या जी उठूंगी 
तेरे आँसूओं से 


आवश्यक सूचना :आदरणीय /आदरणीया आप सभी को 
सूचित करते हुए बड़े  हर्ष का अनुभव  हो रहा है कि
 ''लोकतंत्र'' संवाद मंच अपने सहयोगी चर्चाकारों के लिए आवेदन आमंत्रित करता है। अतः आपसे अनुरोध है कि उत्सुक व समर्पित रचनाकार और पाठक अपना आवेदन दिए गए संपर्क फार्म अथवा ईमेल द्वारा हमें अतिशीघ्र प्रेषित करें। 
तो आइये ! बनायें मिलकर एक नई दुनिया जहाँ अपनी थोड़ी, औरों की ज्यादा सुनें। ( नोट - कृपया इस मंच पर चर्चाकार स्वयं की रचनायें लिंक करवाने की अपेक्षा न रखें । ये ब्लॉग पूर्ण रूप से दूसरे अन्य रचनाकारों की रचनाओं को समर्पित है न कि स्वयं के ) आभार।  

आज्ञा दें ! 


 छायाचित्र स्रोत : गूगल