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शनिवार, 30 दिसंबर 2017

३ ......इक्कीसवीं सदी का बॉयफ्रेंड ( भाग 'एक' )


इक्कीसवीं सदी का बॉयफ्रेंड

इश्क़ एक आग़ का दरिया है,
और डूब के जाना है ! 
पर जाना कहाँ है ?
प्रश्न बड़ा उत्तर विहीन लगता है। 
या यूँ कहें समय-समय की बात है ! 
पुराने ज़माने की फ़िल्मों की बात करें ,
बॉयफ्रेंड उस ज़माने में भी हुआ करते थे,
परन्तु बॉयफ़्रेंडी दिखाने के तरक़ीब कुछ ज़ुदा हुआ करते थे। 
दूर खड़ा रोता-बिलख़ता ,टाइट पैंट व शर्ट पहना प्रेमी ! 
पैरों में सभ्यता पूर्वक बूट धारण किये हुए ,
दूर खड़ी अपनी भविष्य में होने वाली 
गर्लफ्रेंड से बड़े ही शर्मीले ढंग से पलकें झुकाता एकाएक उठाता हुआ,थोड़ा कऱीब जाकर ! दूरी का विशेष ध्यान रखते हुए 

संवैधानिक ढंग से कहता - सुनिए जी ! 
( शेष अगले अंक में )    


सादर अभिवादन 

आज के रचनाकार :


आदरणीया अनुपमा पाठक 

आदरणीय रविंद्र सिंह यादव 

आदरणीया ऋतु आसूजा 

आदरणीया साधना वैद 

आदरणीया शालिनी कौशिक

आदरणीय रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक' 

आदरणीया सुषमा कुमारी 

आदरणीय अरुण कुमार निगम

आदरणीय शान्तनु सान्याल 

आदरणीया मधुलिका पटेल 

आदरणीया यशोदा अग्रवाल 


तट, जीवन और वहीं कहीं हम





 बारिश हो रही है
अकेला है समंदर

 संविधान पर दादा और पोते के बीच संवाद ....





 गाँव की चौपाल पर अलाव 

सामयिक चर्चा का फैलाव 

बिषयों का तीव्र बहाव 

मुद्दों पर सहमति-बिलगाव।

 💐इन्तजार💐 



 पर शायद दिल के किसी के कोने में
करता तो हूँ, मैं भी किसी का इन्तजार
पर किसका ,नाम नहीं जानता उसका

ये रिश्ते 


 कटु वचन 
छुईमुई से सच्चे 
शर्मिन्दा रिश्ते 

आज इलेक्ट्रॉनिक दुनिया है ,
सब कुछ ''ई '' होता जा रहा है ,मतलब ई -गवर्नेंस ,ई -कार्ट ,ई -रिक्शा इत्यादि


 कंकड़-काँटे चुभते अब तो,
पनिहारी के पाँव में।

 प्यार को हारने नही दिया....!!!



 कभी तुम्हे खो देने के डर से,
रातो की मेरी सिसकियों में..
बिखरते-बिखरते....



 सरसी छन्द आधारित गीत


क्या होगा भगवान !
अधजल गगरी करवाती है, अपना ही सम्मान

भरी गगरिया पूछ रही है, क्या होगा भगवान !!



 नींद से जागे तो पाया हर
तरफ बिखरे हुए थे

धुंधलाए दर्पण।

 कुछ पंक्तियाँ



 ऐ ज़िन्दगी तू 
इतना क्यों रुलाती है मुझे 
ये आँखे है मेरी 

कोई समंदर या दरिया नहीं 

 ना जाने कितने मौसम बदलेंगे.....




 कितनी रातें बची हैं?
ना जाने कितना रोना
कितना सहना बचा है?
कब बंद हो जायेंगी आँखें

किस को पता है?


आज्ञा दें !



"एकलव्य"